ग्राहक शिकायत निवारण

पीईवी(PEV) ग्राहकों के अधिकारों को उच्चतम प्राथमिकता और ध्यान में रखेगा-खासतौर पर व्यक्तिगत गोपनीयता, अधिकारों और दायित्वों से संबंधित स्पष्टता,ग्राहकों के रिकार्डों की सुरक्षा,ग्राहक सूचनाओं की गोपनीयता को बनाए रखना और संपूर्ण व्यवसाय आचरण में निष्पक्ष व्यवहार से संबंधित।

  • निजता का अधिकार
  • ग्राहक की गोपनीयता
  • शिकायतों का निवारण

भुगतान प्रणाली से संचालन के साथ जुड़े मामलों के संबंध में प्रणाली पार्टिसिपेंट के बीच शिकायतों का निबटान भुगतान और निबटान प्रणाली अधिनियम,2007 के प्रावधानों के अनुसार किया जाएगा, जैसा कि समय-समय पर संशोधन किया जासकता है।

कंपनी जेईवी(ZEV) के व्यवसाय से संबंधित सभी मामलों और शिकायतों के प्रभावी समाधान के लिए एक समर्पित कॉल सेंटर सुविधा स्थापित करेगी।यह सुविधा सभी पीईवी(PEV) हितधारकों की सहायता करेगी।

  • कॉल सेंटर सप्ताह के 7 दिनों पर 12-घंटों(सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक) तक संचालित होंगे और सभी प्रश्नों/मामलों/शिकायतों के जल्दी और प्रभावी समाधान के लिए जिम्मेदार होंगे।
  • ग्राहकों का सामना करने वाले सभी कर्मचारियों को ग्राहकों की शिकायतों को पूरी और प्रभावी तरह से संभालने का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
  • पीईवी के पास विभिन्न स्तरों पर स्पष्ट रूप से निर्धारित समय ढांचे के साथ एक वर्धन तंत्र है और इस प्रकार के तंत्र और जिम्मेदार व्यक्तियों के संपर्क के साथ विवरणों को पोर्टल पर डाला जाएगा।
सभी शिकायतों पर 3 स्तरों में विचार विमर्श किया जाएगा:
  1. ऑटोमैटिक आइवीआर
  2. सहायता डेस्क - व्यक्तिगत सहायता
  3. वर्धन टीम -उच्च स्तरीय ग्राहक शिकायत निवारण टीम

**मामले = संचालनयोग्य,उत्पाद,प्रक्रिया, हस्तांतरण, सेटलमेंट संबंधित-प्रश्न,मामले या शिकायतें।

**मामले = संचालन योग्य,उत्पाद,प्रक्रिया, हस्तांतरण, सेटलमेंट संबंधित-प्रश्न,मामले या शिकायतें।

**कॉलर/ग्राहक = जुकोडो(ZOKUDO)इलेक्ट्रॉनिक प्रीपेड गिफ्ट वाउचर/कार्ड गिफ्टर, प्राप्तकर्ता और व्यापारी

**कॉल =ईमेल,फोन कॉल, व्याक्तिगत तौर पर जाना।

1. ऑटोमैटिक आइवीआर(IVR)

प्रश्नों के त्वरित और शीघ्र समाधान के लिए सभी आम मामलों का समाधान करने के लिए एक स्मार्ट और प्रभावी आईवीआर प्रणाली डिजाइन की जाएगी। यदि आईवीआर(IVR) प्रणाली कॉलर की समस्या का समान करने के काबिल नहीं है और कॉल "व्यक्तिगत सहायता" का चुनाव करता है, कॉल संबंधित "सहायता डेस्क" को ट्रांसफर कर दी जाएगी।

2. सहायता डेस्क
टिकट संख्या
  • "सहायता डेस्क" को ट्रांसफर करने पर प्रत्येक मामले के लिए एक अद्वितीय टिकट संख्या आवंटित की जाएगी।
  • "सहायता डेस्क" सुपरवाइजर द्वारा प्रत्येक "टिकट संख्या" दिन में दो बार ट्रैक की जाएगी।
  • प्रत्येक "टिकट संख्या" की संपूर्ण जानकारी के साथ एक पूछतांछ रजिस्टर मेनटेन किया जाएगा।
इसके बाद कॉल को सहायता डेस्क के संबंधित विषय मामला विशेषज्ञ को ट्रांसफर कर दिया जाएगा:
  • गिफ्टर सहायता डेस्क
  • प्राप्तकर्ता/विमोचन सहायता डेस्क
  • व्यापारी सहायता डेस्क
इसके बाद प्रत्येक संबंधित सहायता डेस्क कॉल के उद्देश्य की पहचान करेगीः
  • पोर्टल से संबंधित
  • हस्तांतरण से संबंधित
  • विमोचन से संबंधित
  • प्रक्रिया से संबंधित(अन्य)

संबंधित सहायता डेस्क कॉल की समस्या का समाधान करने के लिए हर प्रयास करेगी-इसमें असफल होने पर मामले को "बैकरूम संचालन टीम" को सौंप दिया जाएगा।

बैकरूम संचालन टीम
  • बैकरूम संचालन टीम समस्या को प्राप्त करने के 48 घंटे के भीतर प्रत्येक समस्या की पुष्टि करेगी।
  • बैकरूम संचालन टीम मामले की रसीद के अधिकतम 7 कार्यदिवसों के भीतर सभी प्रश्नों का समाधान करेगी।
3. वर्धन टीम

कॉलर के अनुरोध करने पर या यदि "बैकरूम संचालन टीम" अपेक्षित समय में समस्या का समाधान करने में सक्षम नहीं है, समस्या स्वतः ही एक वर्धन ट्री को रिफर कर दी जाएगी।

वर्धन ट्री 3 स्तरों की बनी होगी, प्रत्येक स्तर को समस्या प्राप्त होने के 7 दिनों के भीतर समस्या का समाधान करने का एक अवसर प्राप्त होगा, जिसमें असफल होने पर समस्या स्वतः ही अगले वर्धन स्तर को बढ़ जाएगा।

स्तर-1वर्धनःविभाग प्रमुख / एचओडी / कार्यात्मक प्रमुखःअमरप्रीत गिल (ईमेल: amarprit@zokudo.com और फोनः 91-22-66756002 Ext: 137)

स्तर-2वर्धनः बिजनेस हेड/सीईओ/सीओओःरत्नेश जैन (ईमेलः ratneshkjain@hmgroupindia.com और फोनः 91-22-66756002 Ext: 128)

स्तर-3 वर्धनःनिदेशक/समितिःयश मेहता (ईमेलः yashmehta@hmgroupindia.com और फोनः 91-22-66756002 Ext: 134 मैनेजिंग)

समस्याएं जिनका समाधान हो गया

केवल निम्नलिखित मामलों में ही किसी भी समस्या का समाधान हुआ माना जाता हैः
a. जहां पर कंपनी द्वारा सूचित किए गए शिकायत के निवारण पर ग्राहक ने कंपनी के निर्णय को स्वीकृति देने की सूचना दी हो; अथवा
b. जहां कंपनी द्वारा निर्णय की सूचना दिए जाने की तिथि के 2(दो) महीने के भीतर,ग्राहक ने कंपनी के निर्णय पर अपनी स्वीकृति की सूचना न दी हो।